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मंगलवार, मई 26, 2020

मंगलवार, मई 26, 2020

Most Haunted Places In India

हम में से बहुत से लोग ऐसे है जो भूतो को नहीं मानते है और बहुत से ऐसे भी है जो भूतो को मानते भी है और उनका भूतो से सामना भी हो चूका है कई लोग सिर्फ उस चीज पर विस्वास करते है जो आँखों से दिखाई दे या हम जिसे हाथो से छू सकते है ऐसी चीज को वे नहीं मानते जिसे न देख सकते है न छू सकते है पर अगर सोचिये हम कही अकेले हो और अचानक से कोई साया हमारे सामने आ जाये तो क्या होगा
न देखने पर अकेले और अँधेरे से बहुत लोग डरते है या हो भी सकता है के आस पास कोई ऐसा हो जो दिखाई न दे रहा हो ऐसे कई लोग है जिन्होंने इन अनजान साओ को महसूस किया है देखा भी है चाहे हम भारत की बात करे या बहार देश की ऐसी कई जगह है जहां पर ऐसे साओ ने अपना डेरा जमा रखा है और इंसानो का उन्हें बिलकुल पसंद नहीं आइये जानते है कुछ ऐसे ही जगहों के बारे में जहां आत्माओ का डेरा है---

१-दिल्ली छावनी--वॉक करने के लिए दिल्ली छावनी बहुत हो बढ़िया जगह है पर जैसे ही यहाँ रात होती है यहाँ जाने से लोग डरते है कहा जाता है रात को जब कोई वहां से गुजरता है एक सफ़ेद सारी पहने औरत उससे लिफ्ट मांगती है और अगर उसने गाडी नहीं रोकी तो वो बराबर से उसके गाडी के साथ दौड़ने लगती है |

२- करकार्डूम दिल्ली कोर्ट- यहां तक ​​कि असाधारण गतिविधियों को यहां रिकॉर्ड किया गया था--करकार्डूम कोर्ट में ऐसी कई डरावनी घटनाये हुई जो कमरे में रिकॉर्ड भी की गई है जिसमे साफ़ साफ़ देखा गया है की फाइलों की दराजे अपनी आप खुल कर बंद हो रही है कागज अपने आप हवा में उड़ रहे है दरवाजे जोर जोर से बंद हो रहे है यह तक की वहां के वकीलों ने कई बार हो रही अजीब घटनाओ का भी जिक्र किया है दिल्ली में सभी प्रेतवाधित स्थानों में से, यह वास्तव में डरावना और अप्रत्याशित है।

३-भानगढ़ किला-भांगगढ़ किले के बारे में कई "वास्तविक" डरावनी कहानियां हैं। भानगढ़ किले की प्रेतवाधितता की सीमा इस तथ्य से स्पष्ट है कि भारतीय पुरातत्व सोसाइटी ने सूर्यास्त के बाद किले के परिसर में पर्यटकों को उपस्थित होने से मना कर चेतावनी संकेत दिए हैं। इसलिए, कोई आश्चर्य नहीं कि किला भारत के सबसे भूतिया स्थानों की सूची में सबसे ऊपर है
भांगगढ़ किला अपने भूतिया घटनाओ के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। भारत की सबसे भूतिया  जगह से जुड़ी कहानी के अनुसार, तांत्रिक सिंघिया राजकुमारी रत्नावती से प्यार में पड़ गया। उसने उसे जीतने के लिए जादू का उपयोग करने की कोशिश की, लेकिन राजकुमारी को उसकी बुरी योजनाओं के बारे में पता चला और उसे मारने का आदेश दिया। तांत्रिक की मृत्यु से पहले, उसने किले के निवासियों को मरने के लिए शाप दिया और गांव के निवासियों को हमेशा के लिए छत रहित रहने के लिए। शहर के कुछ गांव छत रहित हैं। यहां तक ​​कि अगर छत का निर्माण होता है, तो यह जल्द ही गिर जाता है।

४-राजस्थान में कुलधारा गांव -जैसलमेर के पास भूतिया गांव
 कुलधारा जैसलमेर के पास स्थित है और 1 9वीं शताब्दी के बाद से इसे छोड़ दिया गया है। यह 12 9 1 में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा स्थापित किया गया था, जो उनके व्यावसायिक कौशल और कृषि ज्ञान के लिए जाना जाता है। 1825 में एक रात, कुलधारा के सभी लोग और 83 पास के गांव अचानक गायब हो गए।
गायब ग्रामीणों का रहस्य काफी दिलचस्प है। यद्यपि एक कहानी सलीम सिंह की है ये भी काफी चर्चित है,उस राज्य का मंत्री, जो गांव के सरदार की सुंदर बेटी से प्यार करता थापर गांव वाले इस रिश्ते को नहीं चाहते थे ।तब मंत्री ने भारी करों की ग्रामीणों को धमकी दी,तब  गांव के मुखिया ने, पास के 83 गांवों के साथ, अपने गांवों को त्यागने का फैसला किया। यह भी कहा जाता है कि गांववासियों ने जाने से पहले गांव को शाप दिया था कि कोई भी इस गांव में कभी भी निवास नहीं कर पायेगा|

५-सूरत की काली रेट की दुमास बीच-
कहा जाता है काफी समय से इस बीच पर कई लोगो को दफनाया जाता था कई लोग जो वहां कभी अकेले होते उन्होंने किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनी और जो रात को अकेले वहां जाते कभी वापस नहीं आते

६-रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद-रामोजी फिल्मसिटी भी सबसे भूतिया जगहों में से एक है बताया जाता है एक समय में यहाँ अजीब अजीब घटनाये होने लगी थी लाइटे अपने आप गिरने लगती थी अचानक से कोई धक्का मार देता था शिशु पे अपने आप कुछ अंकित हो जाता था कपडे अपनी जगह से गायब हो जाते थे अतः इस जगह को फ़िलहाल बंद कर दिया गया

७-हैदराबाद में कुंदनबाग-कहा जाता है की हैदराबाद के कुंदनबाग के एक दो मंजिल मकान में दूसरे मंजिल पर एक चोर चोरी करने के इरादे से गया अंदर पहोच कर उसने देखा की उस घर में तीन औरतो को लाश पड़ी है चोर ने यह खबर पुलिस में दी बताया जाता है की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला की उन औरतो को मरे हुए तीन महीने हो चुके थे जबकि आस पास पड़ोसियों का कहना था की उन लोगो ने उस औरत और उसकी दो बेटियों को एक दिन पहले तक हाथ में मोमबत्ती लिए बालकोनी में टहलते देखा|

८-हैदराबाद में रविंद्र नगर-हैराबाद में रवींद्रनगर एक ऐसी जगह है जहां २०१२मे लगातार आत्महत्या के केस सामने आरहे थे लोग इसे देवी का प्रकोप मान रहे थे कई आत्महत्याओ के बाद कई लोगो ने इस जगह को छोड़ दिया |

९-पुणे में शनिवारवाड़ा किला- पेशवा राजवंश के सिंहासन के उत्तराधिकारी १३ वर्ष के राजकुमार नारायण को क्रूरता से हत्या कर दी गई थी। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि उनके भूत को रोते हुए बचाने की आवाज लगाते सुना गया है उन्हें कुछ लोगो ने पूर्णिमा की रात को घूमते हुए देखा गया है|

१० -मुंबई में डिसूजा चॉल-इस चॉल में एक महिला टूबवेल में डूबकर मर गई थी उस औरत की आत्मा उस इस चॉल की गलियों भटकने की अफवाह है |

गुरुवार, मई 21, 2020

गुरुवार, मई 21, 2020

True Story

सच्ची कहानिया


किसी भी मनुस्य का अस्तित्व दुनिआ में तब मन जाता है जब वह जिन्दा होता है और हमें दिखाई देता है पर कुछ ऐसा भी है जो आँखों से दिखाई तो नहीं देता पर उनका अस्तित्व इस दुनिया में है और कभी-कभी वो दिखाई भी देते है और सुनाई भी देते है,मनुस्य की हर गतिविधि उसकी आत्मा द्वारा होती है बिना आत्मा के मनुस्य का शरीर मिट्टी मात्र है किसी को नहीं पता मनुस्य की मृत्यु के बाद आत्मा कहा जाती है इसका उत्तर कोई नहीं दे सकता है,बहोत से ऐसे लोग होंगे जिन्होंने अपने परिजन या दोस्त या किसी और की मृत्यु के बाद उस मृत की आत्मा को देखा या महसूस किया होगा या अचानक कोई ऐसी घटना घटी होगी जो समझ के परे हो,हम ऐसी ही कुछ सच्ची कहानीया आपके साथ सांझा करने जा रहे है..

आत्महत्या 
ये बात १९८४ की है विशुन जो एक इंजीनियर था उसका तबादला दार्जिलिंग में हुआ था विशुन अपने पत्नी अपने दोनों बच्चो के साथ दार्जिलिंग के एक बंगले में रहने आया जिस दिन वो लोग वहाँ पहुंचे उसी दिन विशुन को ऑफिस के काम से दो दिनों के लिए शहर से बहार जाना पड़ा,आरती सफर से बहोत थक चुकी थी सारा दिन घर में बहुत काम भी था और उस दिनों वहाँ लाइट भी बहोत कटती थी दिन गुजरने के बाद रात को सोते समय आरती ने शीशे का लैंप जलाया और लैंप उसी कमरे में रख कर बच्चो के पास सो गई सुबह आरती उठती है और बरामदे में जाकर देखती है वहाँ लैंप गिरा पड़ा है उसका सीसा टुटा है और तेल लैंप से बाहर गीरा पड़ा है आरती को थोड़ा अजीब तो लगा फिर उसने बात पर ज्यादा जोर नहीं दिया दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ आज आरती को पूरा याद था की उसने लैंप कमरे में रखा था फिर ये बरामदे में कैसे आ जाता है आरती सारा दिन यही सोचती रही उसी दिन विशुन वापस आगया पर आरती ने उसे कुछ नहीं बताया रात को खाने के बाद आरती बच्चो के साथ सोने चली गई विशुन को कुछ काम था वो निचे सीड़ी वाले कमरे में बैठ कर काम करने लगा आधी रात हो गई थी विशुन काम में मगन था अचानक लाइट चली गई विशुन ने खिड़की के बहार देखा चारो तरफ लाइट थी उसने सोचा आरती जिसे विशुन का देर रात तक काम करना पसंद नहीं था उसी ने बरामदे की मेन स्वीच ऑफ कर दी होगी विशुन ने आवाज लगाई आरती तुमने लाइट ऑफ़ की है क्या बरामदे से आवाज आई हा विशुन ने बोला प्लीज थोड़ी देर और काम कर के सोने जाऊंगा लाइट जला दो प्लीज और लाइट आ गई  विशुन फिर काम करने लगा थोड़ी देर बाद ऐसा फिर हुआ विशुन ने फिर से पूछ आरती प्लीज मुझे काम करने दो लाइट तुमने बंद की है क्या फिर से आवाज आई हा इस बार विशुन सोचने लगा आरती तो ऊपर के कमरे में सोने चली गई थी वो नीचे  कब आई और आई तो दिखी क्यों नहीं,क्युके बरामदे का रास्ता उसी कमरे से होकर जाता है जहा विशुन बैठा था विशुन बहुत कुछ सोचने लगा फिर उसने सोचा उठकर देखना चाहिए ऐसा क्यों हो रहा है विशुन दरवाजे की तरफ जाकर दरवाजा खोलता है और देखता है एक औरत विशुन की तरफ पीठ किये हुए बैठी है वशुन ने पूछा आरती पर उसने कोई उत्तर नहीं दिया विशुन फिर कुछ नहीं बोला वो सीधा ऊपर कमरे में गया पर वहाँ आरती बच्चो के साथ सो रही थी विशुन ने आरती को उठा कर सारी बात बताई फिर आरती ने भी  विशुन को सारी बात बताई उन दोनों ने तय किया की कल ही माकन खाली कर देंगे जैसे तैसे रात गुजरी सुबह माकन खली करने के बाद कुछ लोगो ने बताया की कुछ समय पहले एक औरत ने उस घर में आत्महत्या की थी विशुन को ये बात पहले से पता थी पर वो आत्माओ पर विस्वास नहीं करता था इसलिए विशुन ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया पर अब विशुन को पूरा विस्वास था कि आत्माये होती है और आत्माओ को भी दखल अंदाजी पसंद नहीं.

बीमारी 
ये बात १९६० कि पश्चिम बंगाल के एक गांव की है शोम 10साल का था उसकी हमउम्र दोस्त पूजा जिसका घर भी शोम के घर के बगल में ही था दोनों एक ही क्लास में थे और साथ स्कूल जाना साथ ही खेलना यही दिनचर्या थी दोनों की पर कुछ दिन से पूजा की तबियत ख़राब थी इसीलिए स्कूल नहीं जाती थी शोम के स्कूल से आने के बाद दोनों बहोत खेलते पर कुछ दिन बाद वो खेलने भी नहीं आ पाती धीऱे-धीरे पूजा कमजोर होती जारही थी क्या हुआ था कोई नहीं समझ पा रहा था कई इलाज किया गया पर कुछ असर नहीं हुआ पूजा ने तो अब बात भी करना बंद कर दिया बस जिन्दा थी एक महीने से पूजा बीमार थी इसी बीच शोम माँ के साथ अपने नानी के घर गया  से आते समय शोम खेत से होता हुआ घर आरहा था तभी उसने देखा एक अजीब सा डरावना प्राणी जिसके पुरे शरीर पर आंख जैसा कुछ बना था वो पूजा के शरीर को खा रहा है शोम डर रहा था फिर भी देख रहा था वो इतना डर गया था कि वो अपने माँ को भी कुछ नहीं बता पा रहा था घर पहोच कर उसने देखा पूजा का मृत शरीर उसके घर के बाहर रखा हुआ है उसके घर के सभी लोग रो रहे थे शोम आज तक नहीं समझ पाया कि अगर पूजा का मृत शरीर उसके घर था तो वो कौन थी जिसे वो अजीब सा प्राणी खा रहा था,

वो रात
ये बात २००० की है रमेश को आज ऑफिस में देर हो गई थी रात के १२बज रहे थे रमेश अपनी कार से घर जा रहा था रस्ते में कोई भी दिखाई नहीं देरहा था ठंढ की रात थी रस्ते के दोनों तरफ सिर्फ पेड़ थे थोड़ी दूर पर उसे एक लड़का दिखाई दिया जो रमेश से लिफ्ट मांग रहा था रमेश को घर जाने की जल्दी थी इसीलिए उसने गाड़ी नहीं रोकी थोड़ा आगे जाकर उसने देखा वही लड़का फिर लिफ्ट मांग रहा है रमेश को थोड़ा डर लगने लगा ऐसा कैसे हो सकता है वही लड़का फिर आगे कैसे आ सकता है थोड़ा आगे जाने पर फिर से वही लड़का इस बार भी रमेश ने गाडी नहीं रोकी थोड़ा आगे जाने पर उसे लगा उसकी गाड़ी से कोई बहोत तेज टकराया उसने गाड़ी अचानक से रोक दी उसने देखा वही लड़का गुस्से में रमेश के गाड़ी के सामने खड़ा होकर उसे घूर रहा है रमेश गाड़ी बगल से निकल कर गाड़ी भगाने लगा वो लड़का भी रमेश के साथ-साथ दौड़ने लगा वो बिलकुल गाड़ी के बराबर दौड़ रहा था और वो आगे नहीं देख रहा था वो सिर्फ रमेश को गुस्से में घूर रहा था पर रमेश उसकी तरफ ना देखते हुए गाड़ी चलाये जा रहा था रमेश बुरी तरह डर गया था उसे एहसास हो गया था ये कोई इंसान नहीं है ये कोई बुरी आत्मा है उसने गाड़ी घर जाकर ही रोकी और उतर कर घर में जाकर दरवाजा बंद कर लिया रमेश जैसे ही घर में आगे बढ़ा किसी ने दरवाजा खटखटया रमेश ने दरवाजा नहीं खोला ऐसा कई दिनों तक चलता रहा के हर रात कोई दरवाजा खटखटाता था पर कोई बहार नहीं होता था  रमेश ने अपना ऑफिस जाने का रास्ता भी बदल दिया पर वो उस रात को आज भी नहीं भूल पाया !
गुरुवार, मई 21, 2020

SPIRIT


आत्मा क्या है
प्रकृति के  तत्व होते है पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु,और आकाश प्रकृति में बदलाव इन्ही  तत्व से होते है और इन्ही  तत्व और  गुणों सत्व,राज,और तम की वजह से होते है ये  तत्व संसार की हर चीज पर मौजूद होते है गीता के दूसरे अध्याय में आत्मा का के बारे में बताया गया है ये पूरी सृस्टि आत्मा और प्रकृति के मिलान से बनी है इस संसार में हमें जो भी बदलाव दिखाई देता है वह पृकृति में होता है आत्मा में नहीं परन्तु ये बदलाव आत्मा के आधार से होता है आत्मा अपरिवर्तनशील,सर्वव्यापी,अजन्मा,अव्यक्त और विकार रहित होता है लेकिन प्रकृति परिवर्तनशील विकरवाली होती है,
आत्मा एक ऐसी जीवन शक्ति है जिसके बल पर हमारा शरीर जिन्दा रहता है इसी शक्ति से हमारा शरीर चलता है इसके जीवन शक्ति के बिना हमारे प्राण छूट जाते है और हम मिटटी में फिर मिल जाते है जब शरीर से आत्मा अर्थात जीवन शक्ति निकलती है तो शरीर मर जाता है वापस मिटटी में मिल जाता है इसी तरह आत्मा फिर परमात्मा के पास लौट जाती है,आत्मा आड़ू है बेहद छोटी है परमात्मा आकाश की तरह सर्व व्यापक है,आत्मा का ज्ञान सिमित है ही परमात्मा सर्वज्ञ है वह सबकुछ जनता है,जो कुछ हो रहा है या हो चूका है उसे सब पता है आत्मा की शक्ति सिमित है परन्तु परमात्मा सर्वशक्तिमान है दुनिया को बनाना चलाना प्रलय करना आदि वह सभी काम करने में वह समर्थ है आत्मा और परमात्मा दोनों ही अजन्मा व् अनंत है ये न कभी पैदा होते है न कभी मरते है इनको बनाने वाला कोई नहीं है आत्मा परमात्मा का अंश नहीं है हर आत्मा का अपनी सत्ता होती है,


आत्मा के ३ स्वरूप होते है जीवात्मा,प्रेतात्मा,सूक्ष्मआत्मा जो एक भौंतिक शरीर में वास करती है उसे जीवात्मा कहते है,जब इस जीवात्मा का वासना और कामनामय शरीर में निवास होता है तब उसे प्रेतात्मा कहते है,यह आत्मा जब सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करती है तब उसे सूक्ष्मआत्मा कहते है जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्याग कर उत्तर कार्यो के बाद यात्रा प्रारम्भ करती है तब उसे  मार्ग मिलते है उसके कर्मो के अनुसार उसे एक मार्ग दिया जाता है ये  मार्ग अर्चि मार्ग,धूम मार्ग,उत्पत्ति विनास मार्ग होते है अर्चि मार्ग देवलोक की यात्रा के लिए होता है,धूम मार्ग पृतलोक की यात्रा के लिए और उतपत्ति विनास मार्ग नर्क लोग की यात्रा के लिए होता है,

जब आत्म शरीर त्याग करता है तो उसे यमदूत लेने आते है इसका जिक्र गरुण पुराण में भी मिलता है जिस मनुस्य के जैसे कर्म होते है वे उसे वैसे ही ले जाते है पुण्यात्मा को बहुत ही सम्मान के साथ दुरात्मा को दंड देते हुए ले जाया जाता है गरुण पुराण में बताया गया है की मृत्यु के बाद आत्मा को २४घण्टो के लिए ही ले जाया जाता है जहा उसे उसके द्वारा किये गए पापो और पुण्यो के बारे में बताया जाता है इसके बाद आत्मा को वापस उसी जगह १३ दिनों के उत्तर कार्यो लिए छोड़ दिया जाता है जहा उसने शरीर का त्याग किया था,
१३दिनो के उत्तर कार्यो तक वह वही रहता है १३ दिन बाद आत्मा फिर यमलोक की यात्रा करती है अच्छे और बुरे कर्मो के कारन  मृत आत्माओ  को अच्छा या बुरा माना गया है अच्छी आत्माये अच्छे कर्म करने वालो के माध्यम से तृप्त होकर उसे भी तृप्त करती है और बुरी आत्माये बुरे कर्म करने वालो के माध्यम से तृप्त होकर उसे बुराई करने लिए प्रेरित करती है इसलियर धर्म अनुसार अच्छे कर्म के अलावा धार्मिकता और ईश्वर की भक्ति अति आवस्यक तभी आप दोनों ही तरह के आत्माओ से बच सकते है
भूत प्रेतों की शक्ति और गति अपार होती है इनकी विभिन्न जातीय होती है और इन्हे भूत,प्रेत,पिसाच,यम,शकिनी,डाकिनी,चुड़ैल आदि कहा जाता है एक शरीर से जब दूसरे शरीर से आने-जाने वाली जीवात्मा जब वर्तमान शरीर से निकल जाती है तो उसके साथ जब प्राण व् इन्द्रिय ज्ञान भी निकल जाता है तो मृत शरीर में क्या बाकि रह जाता है यह नजर तो कुछ नहीं आता है असल में परब्रह्म उसमे रह जाता है जो हर चेतन और जड़ प्राणी व् प्रकृति में सभी जगह पूर्ण शक्ति व् स्वरूप में हमेसा मौजूद है,
ऐसा माना जाता है मानव शरीर नस्वर है जिसने जन्म लिया उसे एक न एक दिन शरीर त्यागना ही पड़ता है भले ही मनुष्य या कोई अन्य जीवित प्राणी हो चाहे वो सौ वर्ष क्यों न जी ले परन्तु अंत में उसे शरीर त्याग कर परमात्मा के पास वापस जाना ही पड़ता है जहा से वो आया था!