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गुरुवार, मई 21, 2020

गुरुवार, मई 21, 2020

Kinner

ट्रांसजेंडर 


 किन्नर जिन्हें ट्रांसजेंडर भी कहां जाता है.किन्नरों का अस्तित्व दुनिया के हर देश में है. समाज में हर व्यक्ति
 किन्नर कौन है जानते हैं ये समाज का एक हिस्सा होते हुए भी समाज से बिल्कुल अलग होते हैं किन्नरों की अपनी अलग दुनिया है जिसके बारे में आम लोग कम ही जानते हैं किन्नर भी आम इंसान ही होते है  पर उन्हें जीवन भर तिरस्कार और हीन भावना का सामना करना पड़ता है उनकी गिनती ना तो स्त्री में होती हैं और नाही ही  पुरुष में होती हैं या यूं कहें आधा स्त्री और आधा पुरुष होते हैं. किन्नरों की दुनिया का एक खौफनाक सच ये भी है की यह समाज ऐसे लड़को की तलाश में रहता है जो देखने में सुन्दर हो,जिनकी चाल ढाल थोड़ी कोमल हो जो ऊपर उठाने का ख्वाब देखते हो यह समाज उनसे नजदीकियां  बढ़ता है और और मौका मिलते ही उन्हें बधिया कर दिया जाता है बधिया यानी शरीर के उस अंग को काट देना जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता.किसी नए व्यक्ति को किन्नर समाज में शामिल करने के कुछ नियम है जिसके लिए कई रीती रिवाज है जिनका पालन करना होता है नए किन्नर को शामूह में शामिल करने से पहले नाच गाना और भोज का आयोजन होता है.
 किन्नर के रीति रिवाज बिल्कुल अलग होते हैं उनकी सारी क्रिया-कलाप अनोखी होती है किन्नर साल में एक बार शादी करते हैं और सभी किन्नर अपने आराध्य देव अरावन से 1 दिन के लिए शादी करते हैं अरावन  को किन्नरों के देवता माना जाता है.

अरावन कौन है  
 महाभारत काल में जब अर्जुन को द्रोपती से शादी की एक शर्त को उल्लंघन करने के दोष में 1 साल की तीर्थ यात्रा पर जाना पड़ा था उसी तीर्थयात्रा के दौरान उत्तर पूर्व भारत में अर्जुन की मुलाकात नागलोक की राजकुमारी उलूपी से है होती है दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं कुछ समय पश्चात उलूपी को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है जिसका नाम अरावन रखा जाता है कुछ समय पश्चात अर्जुन अरावन और अपनी पत्नी उलूपी को छोड़कर आगे की यात्रा पर निकल पढ़ते हैं युवा होने के पश्चात महाभारत के युद्ध के समय अरावन नागलोक छोड़कर अपने पिता अर्जुन के पास आ जाता है तथा अर्जुन अपने पुत्र अरावन को रणभूमि में भेज देते हैं युद्ध में एक समय ऐसा आता है जब पांडवों को जीत के लिए मां काली के चरणों में स्वेच्छा से नरबलि हेतु एक राजकुमार की बलि देने की जरूरत होती है तो इसके लिए अरावन स्वेच्छा से आगे आता है उससे पहले अरावन ये इच्छा जाहिर करता है कि वो अविवाहित नहीं मरना चाहता अब यह संकट सामने आता है कि कौन ऐसी स्त्री होगी जो यह जानते हुए कि 1 दिन पश्चात उसे विधवा होना है यह जानते हुए भी अरावन से शादी करेगी तब श्री कृष्ण मोहिनी रूप धारण कर अरावन से शादी रचाते हैं शादी के  दूसरे दिन अरावन स्वेच्छा से मां काली के चरणों में अपना शीश अर्पित कर देता है और मोहिनी रूप धारण श्री कृष्ण अरावन के मृत्यु पर विलाप करते हैं श्री कृष्ण पुरुष होते हुए भी स्त्री रूप में अरावन से शादी करते हैं उसी तरह किन्नर जिन्हें आधा स्त्री आधार पुरुष माना जाता है 1 दिन के लिए अरावन से शादी करते हैं. 
किन्नर खुद को मंगल मुखी मानते है वे हर मांगलिक कार्य में शामिल होते है किन्नर राजा महाराजाओ के ज़माने से नाच गा कर अपनी जीविका चलते थे और आज भी कही शादी या कोई शुभ कार्य हो ये शामिल होकर ख़ुशी मानते है और पैसे और भेट आदि लेते है कहा जाता है किन्नरों का श्राप कभी नहीं लेना चाहिए किन्नरों कि दुआ किसी के भी बुरे समय को बदल देती है.

किन्नरों की शव यात्रा 
  जिस तरह उनकी जीवन शैली अलग होती है उसी तरह शव यात्रा भी अलग होती है किन्नरों की शव यात्रा रात में निकलती है इसमें दूसरे समुदाय को खबर तक नहीं होती यह शव यात्रा बहुत गुप्त तरीके से निकलती है और कोशिश करते हैं कोई इंसान इस शव यात्रा को न देखें और किसी किन्नर की मृत्यु पर यह लोग मातम नहीं  है.शव मनातें  यात्रा निकालने से पहले शव को जूते चप्पल से मारते हैं इसके पीछे यह मान्यता है कि मृतक को अपने पापो से छुटकारा मिल गया और यह दुआ करते हैं कि अगले जन्म में वह किन्नर के रूप में ना जन्म ले भगवान इसे अच्छी जिंदगी दे.यु तो किन्नर जीवन भर हिन्दू धर्म का पालन करते है परन्तु मृत्यु परान्त उनके शव को जलाने के बजाय दफनाया  जाता है !

गुरुवार, मई 21, 2020

The Russian Sleep Experiment


1940 के दशक में,रूस के एक तानाशाह और  रूसी शोधकर्ताओं के एक समूह ने एक समूह ने स्लीप एक्सपेरिमेंट किया था यह जानने के लिए अगर कोई कई दिनों तक नहीं सोता है तो उस के दिमाग पर और उसके शरीर पर क्या असर होता है ये एक्सपेरिमेंट इंसानी सभी एक्सपेरिमेंटो में सबसे क्रूर और भयानक माना गया|पांच सैनिक जो वर्ल्ड वार में पकडे गए थे और वे रसिया में थे एक वायुरोधी कक्ष में पांच लोगो को बंद कर दिया कर दिया गया और उनसे कहा गया के वो लोग अगर ३० दिन तक बिना सोये इस चेंबर में रह लेंगे तो उन्हें मुक्त कर दिया जायेगा।

इन पांचो कैदियों को एक प्रयोगात्मक गैस से ढक दिया गया था जो उन्हें सोने नहीं देता। उनकी बातचीत की  इलेक्ट्रॉनिक रूप से निगरानी की जा रही थी, और उनके व्यवहार पर गुप्त दो-तरफा दर्पणों के माध्यम से निगरानी राखी जा रही थी उन्हें खाने पिने के सारी  सामग्री उस कमरे में देदी गई थी ।
पहले कुछ दिनों के तक, सबकुछ ठीक लग रहा था। लेकिन पांचवें दिन के बाद,धीरे-धीरे तनाव के लक्षण प्रदर्शित होने लगे। वे पागल हो गए और एक दूसरे से बात करना बंद कर दिया,और फिर कुछ समय बाद एक दूसरे के बारे में माइक्रोफोन में फुसफुसाते रहे।

नौ दिन बाद, चिल्लाना शुरू हुआ। दो  कैदियों ने कमरे के चारों ओर दौड़ना शुरू कर दिया और जोर जोर से चिल्लाने लगा और चिल्लाते चिल्लाते उसकी वोकल कॉर्ड फट गई ।और उनमे से एक ने किताबो से कागज फाड़ फाड़ कर शिशो पर चिपका दिए ताकि उन्हें बाहर से कोई देख ना पाए|
अचानक, आवाज़ें रुक गईं, और कक्ष शांत हो गया।जब किसी प्रकार की कोई आवाज नहीं सुनाई दी तब  शोधकर्ताओं ने घोषणा की कि वे कक्ष खोल रहे थे। लेकिन अंदर से एक आवाज ने जवाब दिया: "अब हम मुक्त नहीं होना चाहते हैं।"
फिर पंद्रहवें दिन, उत्तेजक गैस को ताजा हवा से बदल दिया गया था। परिणाम अराजक थे।
उनमे से एक कैदी मर गया था। कई दिनों से न सोने की वजह ने कैदियों को गंभीर रूप से विचलित कर दिया था,वे लोग अपने ही शरीर के मांस को नोच नोच कर फेक रहे थे और  अपने शरीर के चमड़े नोच कर खा रहे थे जो खाना उन्हें रोज दिया जाता था उन लोगो ने उसे हाथ तक नहीं लगाया था| फर्श उनके मांस के टुकड़े और नाली के पानी से  भरा हुआ था।जब शोधकर्ताओं ने इस एक्सपेरिमेंट को बंद करने के लिए सोचा और एनाउंसमेंट किया गया की हम कमरा खोल रहे है अगर आप आजाद होना चाहते है तो सामने से है तो सामने से है जाये  वार्ना हम गोली चला देंगे
जब शोधकर्ताओं ने उन्हें उस कमरे से निकाल कर उनसे पूछना चाहा की वो लोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे है पर वे उस कमरे से बहार आना नहीं चाहते थे उस गैस की उनलोगो को आदत पड़ गई थी और उन लोगो ने शोधकर्ताओं पर हमला कर दिया
उन लोगो ने बल पूर्वक लड़ाई की वे इतने उग्र हो चुके थे की उनमे से एक  ने अपनी मांसपेशियों को तोड़ दिया और संघर्ष के दौरान अपनी हड्डियों को अलग कर दिया।उनलोगो के शरीर में सिर्फ हड्डिया दिखाई दे रही थी उनलोगो ने खुद अपने मांस को नोच नोच कर शरीर से अलग कर दिया जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने खुद को इतना क्यों विचलित कर दिया है, तो प्रत्येक ने एक ही जवाब दिया: "मुझे जागना चाहिए।"
फिर उनलोगो को अस्पताल ले गया गया जहा दो कैदियों की और मौत हो गई बाकि जो दो बचे थे वो ट्रीटमेंट के दौरान जोर जोर से हस रहा था जब उससे उसके हसने का कारण पूछा गया तो उसने यही जवाब दिया की उन्हें जागे रहना है उन लोगो के शरीर में इतना खून भी नहीं था की उनका हार्ट पंप कर सके इस एक्सपेरिमेंट को अब भी नहीं रोका गया उन दोनों को फिर से कुछ नए कैदियों के साथ उस कमरे में डाल दिया गया वे लोग फिर उस कमरे में जाकर फिर वैसा ही बर्ताव करने लगे इस बार कुछ शोधकर्ताओं को भी उसमे डालने की सोची जारही थी तभी एक शोधकर्ता ने इस एक्सपेरिमेंट को करवाने वाले तानाशाह को गोली मार दी और अंदर जाकर उन दोनों कैदिओ से पूछा कौन हो तुम और ऐसा बर्ताव कयू कर रहे हो तब उसने कहा मई तुम्हारे अंदर का शैतान हू तुम्हारी ऐसी सोच हू जो इंसान को जानवर समझते है फिर उस शोधकर्ता ने वह मौजूद सभी को गोली मार दी और खुद को भी गोली मार कर इस एक्सपेरिमेंट को खत्मकर दिया|

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